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à¤à¤‚टीबायोटिक कà¥à¤¯à¤¾ है?
à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का उपयोग उन बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® करने के लिठकिया जाता है जिनसे रोग और इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकते हैं। ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के पनपने और बà¥à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर असर करते हैं और अंततः उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नषà¥à¤Ÿ कर देती हैं। à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ सिरà¥à¤« बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के लिठही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ हैं और इनका उपयोग किसी à¤à¥€ अनà¥à¤¯ ऑरà¥à¤—ेनिजà¥à¤® जैसे, वायरस और फंगी के लिठनहीं किया जा सकता है।
à¤à¤‚टीबायोटिक के पà¥à¤°à¤•ार
अलग-अलग पà¥à¤°à¤•ार के à¤à¤‚टीबायोटिक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पर अलग तरीके से काम करते हैं। इसलिठछोटे से छोटे इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से लेकर बड़े रोगों को ठीक करने के लिठ150 से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤‚टीबायोटिक मौजूद हैं। à¤à¤‚टीबायोटिक को निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में बांटा गया है, जैसे
सेफालोसà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¿à¤¨
फà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤•à¥à¤µà¤¿à¤¨à¥‹à¤²à¥‹à¤¨
à¤à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¿à¤²à¤¿à¤¨
पेनिसिलिन
à¤à¤°à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨
पॉलीपेपà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤¸
टेटà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¤¿à¤¨
à¤à¤®à¤¿à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ोसाइडà¥à¤¸
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®à¤¿à¤‚स
सलà¥à¤«à¥‹à¤¨à¤¾à¤®à¤¾à¤‡à¤¡
जेंटामाइसिन
इनमें से सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पेनिसिलिन, à¤à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¿à¤²à¤¿à¤¨, à¤à¤°à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨, सेफालोसà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¿à¤¨ और जेंटामाइसिन का उपयोग किया जाता है। आपके बेबी के लिठयह कितना सही है, आइठजानें।
कà¥à¤¯à¤¾ छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक सेफ है?
बेबी को à¤à¤‚टीबायोटिक देने से कई खतरनाक इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचाव होता है, जैसे मेनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, निमोनिया, यूरिनरी इंफेकà¥à¤¶à¤¨ (यूटीआई – मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— में इंफेकà¥à¤¶à¤¨) और खून में इंफेकà¥à¤¶à¤¨à¥¤ इसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीके से दिया जा सकता है पर कई दवाओं की तरह ही à¤à¤‚टीबायोटिक के à¤à¥€ साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ होते हैं। इसलिठइसका उपयोग जरूरत होने पर ही करना चाहिà¤à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक सेफ है?
जीवन की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिठà¤à¥€ à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का उपयोग हर समय नहीं करना चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‡ को इसकी जरूरत कब पड़ती है और कब नहीं, यह जानने के लिठआगे पà¥à¥‡à¤‚।
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤‚टीबायोटिक की जरूरत कब पड़ती है?
यदि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होती हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤‚टीबायोटिक देने की जरूरत पड़ती है, आइठजानें;
1. तेज बà¥à¤–ार के लिà¤
बà¥à¤–ार आने का मतलब ही यही है कि शरीर किसी इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से लड़ रहा है। बेबी को 100 – 102 डिगà¥à¤°à¥€ फेरनाइट बà¥à¤–ार हो सकता है। यह अकà¥à¤¸à¤° गंà¤à¥€à¤° रूप से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का संकेत है। इन मामलों में डॉकà¥à¤Ÿà¤° अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¿à¤²à¤¿à¤¨, à¤à¤®à¥à¤ªà¥€à¤¸à¤¿à¤²à¥€à¤¨ या पेनिसिलिन देने की सलाह देते हैं à¤à¤²à¥‡ ही यह पूरी तरह से सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ न हà¥à¤† हो कि यह à¤à¤• बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है।
2. कान में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लिà¤
यदि बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कान का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होता है तो इसे खà¥à¤¦ से ठीक होने के लिठ1 – 2 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का इंतजार किया जाता है। बेबीज की बात अलग है और वे कान के इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के कारण हà¥à¤ दरà¥à¤¦ व तकलीफ को दिखा नहीं सकते हैं और इसलिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¸à¤¿à¤²à¤¿à¤¨ नामक à¤à¤‚टीबायोटिक देना जरूरी होता है। कान में गंà¤à¥€à¤° रूप से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के लकà¥à¤·à¤£ हैं, बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोना, सोने में कठिनाई, इरिटेशन होना, तेज बà¥à¤–ार और कान में खà¥à¤œà¤²à¥€ या बचà¥à¤šà¥‡ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कान खींचना।
3. निमोनिया के लिà¤
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में निमोनिया वायरस की वजह से होता है या बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की वजह से यह बता पाना कठिन है। रेसà¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ सिसà¥à¤Ÿà¤® के ऊपरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ में वायरल होने के लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ समान ही होते हैं, जैसे खांसी, सांस लेने में दिकà¥à¤•त, बà¥à¤–ार या उलà¥à¤Ÿà¥€à¥¤ चूंकि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में निमोनिया से होने वाले कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤•ेशंस अकà¥à¤¸à¤° खतरनाक हो सकते हैं इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥à¤¸ का पता न लगने पर à¤à¤‚टीबायोटिक पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¬ करते हैं।
4. सूखी खांसी के लिà¤
यदि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में खांसी और बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं तो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤‚टीबायोटिक देने से पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में ही काफी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ दिखाई देने लगता है। आमतौर पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤œà¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨, à¤à¤°à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨ और कà¥à¤²à¥‡à¤°à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨à¥¤
सूखी खांसी के लिà¤
5. यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लिà¤
मूतà¥à¤° मारà¥à¤— में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ यानी यूटीआई तब होता है जब पॉटी या अनà¥à¤¯ अनà¥à¤¯ जगहों से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° या किडनी में आ जाते हैं। यूटीआई के लकà¥à¤·à¤£ चिड़चिड़ापन, डायरिया, बà¥à¤–ार और उलà¥à¤Ÿà¥€ हैं और यूरिन रूटीन माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी व यूरिन कलà¥à¤šà¤° टेसà¥à¤Ÿ के परिणामों का उपयोग करके इसका डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ किया जा सकता है।
6. अनà¥à¤¯ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लिà¤
अनà¥à¤¯ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¬ की जाती है, जैसे गले में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ या साइनस इंफेकà¥à¤¶à¤¨à¥¤ इसके आम लकà¥à¤·à¤£ हैं तेज बà¥à¤–ार, जà¥à¤•ाम और कà¤à¥€-कà¤à¥€ सिर में दरà¥à¤¦à¥¤
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤‚टीबायोटिक की जरूरत कब नहीं होती है?
जैसा पहले à¤à¥€ बताया है कि à¤à¤‚टीबायोटिक सिरà¥à¤« बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने के लिठहै। कई दूसरी बीमारियां हैं जिनके लिठबचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤‚टीबायोटिक देने की जरूरत नहीं पड़ती है। बहà¥à¤¤ सारे वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨, जैसे फà¥à¤²à¥‚, बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस, कà¥à¤°à¥à¤ª, जिसमें आम सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम, खांसी और बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं लेकिन इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤‚टीबायोटिक से ठीक नहीं किया जा सकता।
à¤à¤‚टीबायोटिक कितनी जलà¥à¤¦à¥€ काम करना शà¥à¤°à¥‚ कर देते हैं?
टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट शà¥à¤°à¥‚ होने के बाद ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° बचà¥à¤šà¥‡ 48 से 72 घंटों में ठीक हो जाते हैं। वैसे तो यह याद रखना जरूरी है कि अचà¥à¤›à¤¾ महसूस करने का मतलब पूरी तरह से रिकवर होना नहीं है। à¤à¤‚टीबायोटिक का कोरà¥à¤¸ पूरा होना जरूरी है ताकि सà¤à¥€ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को नषà¥à¤Ÿ किया जा सके। सही होने के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ संकेतों के साथ या बीच में ही यह कोरà¥à¤¸ बंद करने से माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬ à¤à¤‚टीबायोटिक का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ बनाने लगता है और बचà¥à¤šà¤¾ थोड़े दिनों के बाद दोबारा बीमार पड़ सकता है जिसके लिठउसे अधिक सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¨à¥à¤— à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ देने पड़ सकते हैं।
अब तक आपको पता होना चाहिठकि à¤à¤‚टीबायोटिक का उपयोग सिरà¥à¤« बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने के लिठकिया जाता है। यहाठइसके कà¥à¤› फायदे à¤à¥€ बताठगठहैं, जानने के लिठआगे पà¥à¥‡à¤‚।
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक के फायदे
सबसे पहली à¤à¤‚टीबायोटिक दवा पेनिसिलिन की खोज और 1940 से इसका बड़े पैमाने पर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² शà¥à¤°à¥‚ होने के बाद से कई à¤à¤‚टीबायोटिक टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (टीबी), निमोनिया और मेनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ जैसी घातक बीमारियों को ठीक करने के लिठउपयोग की जाती रही हैं।
पिछले 79 से अधिक सालों में à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं ने लाखों लोगों के जान बचाई है। वासà¥à¤¤à¤µ में पेनिसिलिन की खोज होने से पहले हर 10 में से 1 बचà¥à¤šà¥‡ की बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से मृतà¥à¤¯à¥ होती थी।
à¤à¤‚टीबायोटिक दवाà¤à¤‚ कम उमà¥à¤° में ही बीमारियों को खतà¥à¤® कर देती हैं और यह इन बीमारियों से होने वाले दूरगामी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ और विकलांगताओं से à¤à¥€ बचाती हैं।
इन फायदों के साथ हम आपको à¤à¤‚टीबायोटिक से होने वाले साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ à¤à¥€ बताना चाहेंगे। हाà¤, अनà¥à¤¯ दवाओं के जैसे ही à¤à¤‚टीबायोटिक से कई साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ होते हैं, जानने के लिठआगे पà¥à¥‡à¤‚।
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸
यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ à¤à¤‚टीबायोटिक लेने से काफी फायदा होता है पर इसके कई साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ à¤à¥€ हो सकते हैं। शिशà¥à¤“ं में इससे होने वाले कà¥à¤› साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ के बारे में जानने के लिठआगे पà¥à¥‡à¤‚;
1. लकà¥à¤·à¤£ संबंधी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ
à¤à¤‚टीबायोटिक लेने से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ यà¥à¤•à¥à¤¤ साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ हो सकते हैं, जैसे रैशेस, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, मतली, उलà¥à¤Ÿà¥€, डायरिया, पेट में दरà¥à¤¦, हलà¥à¤•ा सा सिर à¤à¤¾à¤°à¥€ होना या सिर में दरà¥à¤¦à¥¤ अनà¥à¤¯ à¤à¤‚टीबायोटिक सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रहने की नरà¥à¤µà¥à¤¸ को डैमेज कर सकते हैं और साथ ही इससे चकà¥à¤•र, मतली व कान में घंटी की आवाज आने जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।
2. à¤à¤‚टीबायोटिक से अचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ नषà¥à¤Ÿ हो जाते हैं
6 महीने से कम उमà¥à¤° के बेबीज के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक का उपयोग सावधानी से करना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के साथ आंतों में मौजूद गà¥à¤¡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को à¤à¥€ नषà¥à¤Ÿ कर देता है। आंतों में मौजूद ये उपयोगी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पाचन ठीक रखने में मदद करते हैं और अनà¥à¤¯ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से लड़ते हैं। अचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर में पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से होने वाले यीसà¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨, जैसे कैंडिडा पर à¤à¥€ नजर रखते हैं। इसलिठयीसà¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¤‚टीबायोटिक लेने से होने वाला à¤à¤• आम साइड इफेकà¥à¤Ÿ है।
3. इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® डैमेज हो जाता है
à¤à¤‚टीबायोटिक रोगों का à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ उपचार है पर इसका उपयोग ठीक से न करने पर यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठहानिकारक à¤à¥€ हो सकता है। जैसा पहले à¤à¥€ बताया गया है कि à¤à¤‚टीबायोटिक आंतों में मौजूद अचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® कर देता है। यह आंतों में मौजूद कॉमेनà¥à¤¸à¤² बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के विकास में बाधा à¤à¥€ बन सकता है। इसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® लंबे समय के लिठकमजोर हो जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पाचन तंतà¥à¤° में मौजूद बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को बनाने में मदद करते हैं।
4. à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨
पेनिसिलिन या सलà¥à¤«à¤¾à¤®à¤¾à¤‡à¤¡ परिवार से संबंधित à¤à¤‚टीबायोटिक लेने पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होना अधिक आम है। यदि बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है और उसे यह à¤à¤‚टीबायोटिक दी गई है तो इसके तà¥à¤°à¤‚त बाद या कà¥à¤› दिन के बाद उसे पितà¥à¤¤à¥€ (हाइवà¥à¤¸), खà¥à¤œà¤²à¥€à¤¦à¤¾à¤° दाने, सांस लेने में कठिनाई और सूजन का अनà¥à¤à¤µ होगा।
5. à¤à¤‚टीबायोटिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§
जीवित ऑरà¥à¤—ेनिजà¥à¤®, जैसे बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ समय के साथ à¤à¤‚टीबायोटिक के लिठबाधा बन सकते हैं। यह बाधा बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤‚टीबायोटिक लेने या वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लिठà¤à¥€ à¤à¤‚टीबायोटिक का उपयोग करने से à¤à¥€ होती है। à¤à¤‚टीबायोटिक का बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग करने के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ के बारे में आगे बताया गया है। à¤à¤‚टीबायोटिक रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स या à¤à¤‚टीबायोटिक में बाधा तà¤à¥€ आती है जब इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने के लिठइसका उपयोग सही से न किया गया हो या डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इसका पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¬ कोरà¥à¤¸ पूरा न किया गया हो।
6. सà¥à¤ªà¤°à¤¬à¤—à¥à¤¸
à¤à¤‚टीबायोटिक रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स से कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बनते हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोई à¤à¥€ à¤à¤‚टीबायोटिक टैबलेट नषà¥à¤Ÿ नहीं कर सकती है। इस पà¥à¤°à¤•ार के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को सà¥à¤ªà¤°à¤¬à¤—à¥à¤¸ कहा जाता है और à¤à¤¸à¥‡ में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ पूरी तरह से ठीक नहीं होता है इसलिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वासà¥à¤¤à¤µ में इससे काफी खतरा हो सकता है।
बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤‚टीबायोटिक का उपयोग करने से संबंधित जोखिम
à¤à¤‚टीबायोटिक का बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग करना à¤à¤• मà¥à¤–à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पेरेंटà¥à¤¸ सेफà¥à¤Ÿà¥€ के लिठइसकी मांग करते हैं ताकि सामानà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं, जैसे सरà¥à¤¦à¥€ या फà¥à¤²à¥‚ से बचा जा सके। डॉकà¥à¤Ÿà¤° के लिठसमय लेकर पेरेंटà¥à¤¸ को à¤à¤‚टीबायोटिक का उपयोग कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं करना चाहिठयह बताने से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आसान à¤à¤• à¤à¤‚टीबायोटिक पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¬ करना है।
à¤à¤‚टीबायोटिक सीधे मेडिकल सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° खरीदी जा सकती हैं और अकà¥à¤¸à¤° लोग खà¥à¤¦ से ही यह दवा ले लेते हैं। कà¥à¤› पेरेंटà¥à¤¸ बचà¥à¤šà¥‡ के बीमार पड़ने पर à¤à¥€ उसे à¤à¤‚टीबायोटिक देते हैं। à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में मेडिकल कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤•ेशंस से बचने के लिठयह बिलकà¥à¤² à¤à¥€ नहीं करना चाहिà¤à¥¤
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